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सपा की हार का मुख्य कारण बनी बसपा

by Admin Desk
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लेखक: राम प्रकाश राय, पत्रकार

लेखक: राम प्रकाश राय, पत्रकार

उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के नतीजे आ चुके हैं. तमाम तरह के दावे, मुद्दे और समीकरणों को धता बताते हुए 5 में से 4 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की. राजनैतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण प्रदेश यूपी में भी भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की. महत्वपूर्ण इसलिए कि माना जाता है कि केंद्र कि सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश विधानसभा से होकर ही गुजरता है. नतीजों के बाद अब सभी दलों में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. कहीं हार की समीक्षा हो रही है तो कहीं भविष्य में वोटरों को अपने साथ जोड़े रखने की कवायद.

ये चुनाव उत्तर प्रदेश में अब तक हुए चुनावों से बिलकुल अलग रहा. यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू,  योगी का हिंदुत्व और फ्री राशन जैसी योजनाओं के साथ-साथ मायावती को बड़ा कारण माना जा रहा है। राजनैतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है की मायावती ने टिकटों का वितरण उसी हिसाब से किया जिससे भाजपा को सीधा लाभ हो. इसके अलावा वो पुरे चुनाव में केवल समाजवादी पार्टी पर ही निशाना साधती दिखाई दीं.

बहरहाल परिणाम आने के बाद से ही भाजपा की जीत और सपा की हार के कई अलग-अलग कारण बताये जा रहे हैं. आइये जानते हैं सपा की हार के कुछ प्रमुख कारण.

उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण रहा कानून व्यवस्था का मुद्दा. बुलडोज़र बाबा के रूप में अपनी छवि बना लेने वाले CM योगी आदित्यनाथ चुनाव के शुरुआत से ही इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे. इतना ही नहीं योगी ने अपने 70 में से 58 रैलियों में जमकर बुलडोजर की बात की और इन सभी सीटों पर भाजपा पहले से भी मजबूत हुई. दरअसल जनता ने इसे कानून व्यवस्था की मजबूती और माफियों के खात्मे के रूप में देखा.

दुसरे नंबर पर रहा मोदी मैजिक। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू इस बार भी यूपी की जनता के सर चढ़ कर बोला. इतना ही नहीं पार्टी ने मोदी मैजिक का इस्तेमाल वहां ज्यादा किया, जहां योगी से लोगों की थोड़ी-बहुत नाराजगी थी। चुनाव के शुरुआती दो चरणों में PM की सभाएं नहीं हुईं. कुछ वर्चुअल संबोधन हुए. हालांकि PM की सभाएं न होने को विरोधियों ने किसान आन्दोलन के प्रभाव और भाजपा के डर के तौर पर प्रचारित किया पर नतीजों ने इसे सिरे से ख़ारिज कर दिया. PM मोदी ने अपनी 19 जनसभाओं में लगभग 192 सीटें कवर की. इनमें से 134 पर भाजपा को जीत मिली.

तीसरे नंबर पर बसपा कारण रही, जिसका जिक्र हमने ऊपर किया. माना जा रहा है कि बसपा ने BJP के हिसाब से समीकरण बनाने में उसकी मदद की. उसी के हिसाब से तमाम सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे जिससे भाजपा की राहें आसान हो गईं. इतना ही नहीं मायावती का बिल्कुल न्यूट्रल रहना और केवल सपा पर हमलावर होना भी इन आरोपों को मजबूत बनाते हैं. सुर्ख़ियों की मानें तो मायावती ने 122 सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतारे जो सपा उम्मीदवार की ही जाति के थे और जहां जातीय समीकरण के हिसाब से सपा मजबूत थी.

चौथे स्थान पर सपा का मुस्लिम प्रेम रहा. समाजवादी पार्टी खुद को मुस्लिमों के हितैषी होने की छवि से बाहर नहीं निकाल पाई. सपा की इस छवि का पूरा फायदा भाजपा को मिला. रही-सही कसर बाहुबली मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने अधिकारियों को धमका कर पूरी कर दी. इससे बड़ी संख्या में सपा के वोट कटे.

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पांचवा कारण रहा अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की जोड़ी भी सपा-रालोद गठबंधन के खेमे में जाट वोट नहीं ला सकी। जयंत के साथ से सपा की रैलियों में भीड़ तो खूब जुटी पर ये भीड़ वोट में कन्वर्ट नहीं हो पाई. इसका अंदाज पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के गढ़ रहे सीटों से लगाया जा सकता है। आकड़ों के अनुसार यहां 30 सीटों पर लड़ने वाली रालोद 8 सीटें ही जीत पाई। गठबंधन के सहारे पहले और दूसरे चरण में खुद को बेहद मजबूत मान रही सपा को यहां केवल निराशा ही हाथ लगी.

बहरहाल अब चुनाव नतीजे आ चुके हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैबिनेट की अंतिम बैठक कर इस्तीफा भी दे चुकें हैं. भाजपा लगातार दूसरी बार सरकार गठन कि तैयारी में लगी हुई है. कल यानि 13 जनवरी को कार्यवाहक CM योगी आदित्यनाथ, भाजपा के संगठन मंत्री सुनील बंसल और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के दिल्ली जाने कि खबर है. साथ ही खबर है कि शपथ ग्रहण अब होली के बाद ही होगा.

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