Home राजनीति क्या विपक्षी पार्टी भी नहीं बन पाएगी कांग्रेस ?

क्या विपक्षी पार्टी भी नहीं बन पाएगी कांग्रेस ?

by National News Desk
कांग्रेस पार्टी के पास अपने बल पर सिर्फ दो राज्य में मुख्यमंत्री बचे है राजस्थान और छत्तीसगढ़। कांग्रेस पार्टी की हालत इतनी खराब है की लोग अब ये सवाल नहीं उठा रहे की 2024  के लोकसभा में कांग्रेस पार्टी सरकार बना पाएगी या नहीं बल्कि लोग अब इस बात पर सवाल उठा रहे है कि कांग्रेस पार्टी 2024 के बाद विपक्षी पार्टी के रूप में रहे भी पायेगी या नहीं। तो ये कोई चौकाने वाली बात नहीं है अब बहुत से लोग कहने लगे है की कांग्रेस पार्टी अब अपने END GAME में है। आखिर क्या हो गया है कांग्रेस पार्टी को क्या गलतियां की है इन्होने जो इनकी हालत आज ये हो गई  है। अब कांग्रेस पार्टी अपने आपको बचाने के लिए क्या कर सकती है ।
कांग्रेस को खुद को बचाने का सवाल बहुत जरुरी है , क्योंकि हमें एक अच्छे लोकतंत्र में एक मजबूत सरकार के साथ एक मजबूत विपक्ष की भी जरुरत होती है और अगर कांग्रेस मजबूत विपक्ष नहीं बन सकती तो किसी और पार्टी को सामने आना पड़ेगा। एक मजबूत विपक्ष बनने के लिए किसी भी पार्टी को कांग्रेस के बराबर पहुंचने में अभी बहुत समय लगेगा।
अगर आने वाले कुछ समय तक देखा जाए तो कांग्रेस ही मुख्य विपक्ष चेहरे की तरह रहेगी, 2023  के राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव तक। तो मोटे मोटे तौर पर देखा जाए कांग्रेस के बचा है सिर्फ एक साल अपनी डूबती हुई नाव बचाने के लिए।  अगर अगले साल राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी हार जाती है तो पार्टी सही मायने में पूरी तरह से खत्म हो सकती है। यह पर पार्टी को रिकवर करने के लिए अपनी गलतियों को समझना पड़ेगा।
नजर डालते हैं कांग्रेस की गलतियों पर 
राहुल गाँधी के माथे पर ठप्पा लग चूका है राजवंश होने का ,अब ऐसा भी नहीं है की बाकी पार्टी में कोई राजवंशीय पॉलिटिशियन नहीं है। बहुत राजवंशीय पॉलिटिशियन हैं इंडियन पॉलिटिक्स में हर पार्टी में आपको मिलेंगे।  समाजवादी पार्टी में  अखिलेश यादव, शिवसेना में उद्धव ठाकरे, आरजेडी में तेजस्वी यादव, बीजेडी  में  नवीन पटनायक उसके अलावा भाजपा जैसी पार्टी में राजवंशीय पॉलिटिशियन भरे पड़े है पियूष गोयल, अनुराग ठाकुर,पूनम महाजन, वरुण गाँधी।
इतने राजवंशीय पॉलिटिशियन में सिर्फ राहुल गाँधी का नाम ही क्यों आता है , इसके पीछे दो कारण है पहला ये की वो अनौपचारिक प्रमुख है कांग्रेस पार्टी के और दूसरा वो इतने सक्षम नहीं है, अगर वो खुद में एक सक्षम पॉलिटिशियन होते तो लोग इस राजवंशीय टैग को नज़रअंदाज भी कर सकते थे। अगर आप कांग्रेस पार्टी की वेबसाइट पर जा कर देखे तो कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी है उसके निचे कांग्रेस पार्टी के नौ जनरल सेकेट्री है प्रियंका गाँधी उसमे से एक है लेकिन राहुल गाँधी का नाम इस लिस्ट में नहीं है।
उसके अलावा कांग्रेस ने हर स्टेट में स्टेट इंचार्ज बना रखा है उसमे भी राहुल गाँधी कही नाम नहीं है। आधिकारिक तौर पर देखा जाये तो कांग्रेस वर्किंग समिति है जिसके 20 सदस्य है उन में से राहुल गाँधी भी है। साल 2019 तक राहुल गाँधी अध्यक्ष थे लेकिन फिर बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था लेकिन फिर भी आज के दिन 2022 में भी कांग्रेस के बारे में दखते है सुनते है या सोचते है तो राहुल गाँधी का चेहरा सबसे आगे दिखाई पड़ता है।
वैसे कांग्रेस पार्टी की आंतरिक संगठन इतनी खराब है, जैसे सोनिया गाँधी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष है लेकिन किसी भी रैली, मीडिया, सोशल मीडिया में कहीं दिखाई नहीं देती है।
हम लेकिन ये नहीं बोल सकते की वो असफल नेता है, 2004 और 2009 में जो कांग्रेस की जीत हुई थी उसमे सोनिया गाँधी का बहुत बड़ा हाथ था लेकिन आज के दिन कांग्रेस की अध्यक्ष क्यों नहीं कही दिखाई देती है और इसी से संबंधित प्रियंका गाँधी के बहुत से कांग्रेस समर्थकों का ये मानना था कि प्रियंका गाँधी एक ट्रम्प कार्ड है ,एक बार मैदान में आ गई तो फिर देखना क्या होगा।
लेकिन जब आई मैदान में तो हमने देखा क्या हुआ कांग्रेस को सिर्फ दो सीट मिली यूपी में ,जब वो इतने समय से राजनीती में नहीं थी और जब वो आई और अगर सफल नहीं हो पाई तो इसमें कोई चौकाने वाली बात नहीं है।  लेकिन फिर भी बार बार कई कांग्रेस नेता इन्ही तीन नेता का नाम और चेहरा सामने रखते है ” GANDHI FAMILY “.
तो इन लोग को हैरान नहीं होना चाहिए जब दूसरी पार्टी इनको पारिवारिक पार्टी बताते है।
दूसरी बड़ी परेशानी कांग्रेस में ये है आप गाँधी परिवार के अलावा आप किसी और को नहीं जानते है। ज्यादा तर राजनैतिक पार्टी आंदोलन पर चलती है, ग्राउंड वर्क पर चलती है और कांग्रेस पार्टी के नेता जमीन पर दिखाई नहीं देते और इसलिए ज्यादा मीडिया पर भी नहीं दिखाई देते है। क्या कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता ने कोई भी बड़ा काम किया कांग्रेस पार्टी के फेवर में या कांग्रेस पार्टी को बचाने की कोशिश की। क्या किसी नेता को ये लगा हो राहुल गाँधी सही नहीं तो किसी और को लाया जाए।  यही सब वजह है कांग्रेस पार्टी यूपी में सिर्फ दो सीट पर रह गई .
 2018 -2020 में कुछ बड़े चैनल ने सर्वे किए थे की कांग्रेस पार्टी का सबसे चर्चित नेता कौन है तो राहुल गाँधी का नाम आया था। परेशानी सिर्फ राहुल गाँधी में नहीं है बाकि जो कांग्रेस पार्टी के नेता है उन्होंने भी कभी महेनत नहीं की  ऊपर उठने की इसलिए ये सवाल उठाया जाता है की अगर गाँधी परिवार कांग्रेस पार्टी को छोड़कर निकल गया तो क्या कांग्रेस पार्टी बचेगी ? ये परेशानी बाकी सब विपक्षी पार्टी में इतनी नहीं है।
 कांग्रेस पार्टी को हर जगह गाँधी परिवार को हटा कर नए नेता को लाना चाहिए। कांग्रेस पार्टी के पास एक साल बचा है राजस्थान और छत्तीसगढ़ दो जगह पर उनकी सरकार है क्या वो एक साल में कुछ ऐसा काम करके दिखा सकते है की अगले साल राजस्थान और छत्तीसगढ़ में रहने वाले लोग फिर से कांग्रेस को वोट करेंगे और जिताएंगे। यही देखने वाली बात होगी…

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