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राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

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राजद्रोह के कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्टे लगा दिया है. अब जब तक केंद्र सरकार इसपर विचार नहीं कर लेती तब तक इस धारा में कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता. साथ ही केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को इसमें कोई नया मामला दर्ज नहीं करने का आदेश भी दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजद्रोह कानून के तहत नये मुकदमे दर्ज न हों, साथ ही जो मामले पहले से लंबित हैं उनमें भी अदालती कार्रवाई रोक दी जाये. जो मरीज जेल में बंद हैं उन्हें जमानत के लिए कोर्ट जाने की छूट है.

हालांकि इस कानून के सम्बन्ध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार के समीक्षा के लिए और समय दिए जाने के अनुरोध को मान लिया और समीक्षा होने तक अंतरिम व्यवस्था लागू रखने का आदेश दिया है.

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राजद्रोह कानून (Sedition Law) यानि आईपीसी की धारा 124A को सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलहाल निष्प्रभावी बना दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देश में इसे लेकर चर्चा अब बढ़ गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है.

राहुल ने ट्विट किया कि ‘सच बोलना देशभक्ति है, देशद्रोह नहीं. सच कहना देशप्रेम है, देशद्रोह नहीं. सच सुनना राजधर्म है, सच कुचलना राजहठ है, डरो मत!’

क्या है राजद्रोह कानून?

राजद्रोह कानून (Sedition Law) आईपीसी की धारा 124ए के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति सरकार के विरोध में कुछ लिखता या बोलता है या फिर ऐसे किसी स्टेटमेंट या सामग्री का समर्थन करता है तो ये इसके तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.

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साथ ही राष्ट्रीय चिन्हों के अपमान, संविधान को नीचा दिखाने और देश विरोधी संगठन के साथ सम्बन्ध रखने पर भी आईपीसी की धारा 124ए राजद्रोह लगाया जाता है.

राजद्रोह के आरोप में दोषी पाए जाने पर व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग जातीं हैं. मसलन वह सरकारी नौकरी में आवेदन नहीं कर सकता, उसका पासपोर्ट नहीं बन पाता, यदि पहले से बना है तो वो निरस्त हो जाता है. दोषी को 3 साल से आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है. इसमें जमानत नहीं मिलती.

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