Home राजनीति ‘अधिकारियों के हिसाब-किताब’ पर अब्बास की बढ़ी मुश्किलें

‘अधिकारियों के हिसाब-किताब’ पर अब्बास की बढ़ी मुश्किलें

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बीते विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गये भड़काऊ भाषण के मामले में मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की मुश्किलें बढ़ सकतीं हैं. हाईकोर्ट में उनकी याचिका ख़ारिज होने के बाद अब्बास पर गिरफ़्तारी की तलवार लटकती दिखाई दे रही है.

“समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी से कह कर आया हूं कि छ: महीने किसी की ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं होगी भईया. जो यहां है, यहीं रहेगा, पहले हिसाब-किताब होगा. उसके बाद उनके जाने के सर्टिफिकेट पर मुहर लगाई जाएगी.”

मुख़्तार अंसारी के बेटे और अब मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी का ये बयान तो याद ही होगा. हाल में संपन्न 18वीं विधानसभा के चुनाव में दिया गया ये बयान मीडिया की सुर्ख़ियों में रहा था.

03 मार्च की रात कोतवाली थाना क्षेत्र के पहाड़पूरा मैदान में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए अब्बास अंसारी ने ये बयान दिया था. उन्होंने चुनाव जीतने और समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर अधिकारियों क हिसाब-किताब करने की बात कही थी. पर अब्बास का ये बयान उनके लिए ही मुसीबत बन गया जो अब और बढ़ गई है.

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चुनाव आयोग ने अब्बास के बयान का संज्ञान लेते हुए प्रचार पर 24 घंटे की रोक लगा दी थी. चार मार्च को अब्बास के खिलाफ 151एफ और आईपीसी की धारा 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. विवेचना के बाद पुलिस ने इसमें 186, 189, 153ए और 120बी धाराएं बढ़ा दीं.

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अब भड़काऊ भाषण देने के मामले में अब्बास को एक और झटका लगा है. गुरुवार को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी को राहत देने से इंकार करते हुए उनकी याचिका ख़ारिज कर दी. अब्बास ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द करने और गिरफ़्तारी पर रोक लगाने की अर्जी दी थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है. इससे पहले हाईकोर्ट ने ही अब्बास की गिरफ़्तारी पर रोक लगाई थी.

ऐसे में अब मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी की मुश्किलें और बढ़ सकतीं हैं. हाईकोर्ट से उनको राहत न मिलने पर अब उनपर गिरफ़्तारी की तलवार लटकी दिखाई दे रही है.

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