Home देस-परदेस क्वाड में छाया चीन का मुद्दा

क्वाड में छाया चीन का मुद्दा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान दौरे पर हैं. PM ने टोक्यो में क्वाड शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन ने कम समय में दुनिया में अहम जगह बना ली है। आज क्वाड का दायरा व्यापक हो गया है, इसका रूप प्रभावी है। क्वाड के माध्यम से और हमारे आपसी सहयोग से, एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी एशिया-प्रशांत क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह हम सभी का साझा लक्ष्य है।

बताते चलें कि 2007 में हिंद महासागर में सुनामी आने के बाद भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने आपदा राहत प्रयासों में सहयोग करने के लिए एक अनौपचारिक गठबंधन बनाया था। ये चारों देश विश्व की बड़ी आर्थिक शक्तियां हैं। जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इसे क्वाड्रीलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग या क्वाड का रूप दिया। 2017 में जब चीन का खतरा बढ़ा तो चारों देशों ने क्वाड को पुनर्जीवित किया, इसके उद्देश्यों को व्यापक बनाया। इसके तहत एक ऐसे तंत्र का निर्माण किया जिसका उद्देश्य धीरे-धीरे एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित करना है और इसके केंद्र में है चीन। ये चारों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी और उसके प्रभाव को काबू में करना चाहते हैं। खासकर जापान और भारत ने क्वाड बनाने की पहल की।

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अमेरिका लंबे समय से चीन के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंतित है। इसी तरह जापान और ऑस्ट्रेलिया दोनों दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति को लेकर परेशान है। भारत क्वाड का एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमाएं चीन से लगती हैं जहां चीन लगातार अपना सैन्य प्रभाव बढ़ाने में लगा है. वहीं चीन शुरू से ही क्वाड के गठन का विरोध करता रहा है, जो अभी भी जारी है. चीन इसे केवल सुर्खियों में रहने वाला विचार बताता आया है.

क्वाड नेताओं की इस शिखर बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन व जापान के पीएम फुमिओ किशिदा ने रूस का मुद्दा उठाया। क्वाड नेताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारा आपसी विश्वास और हमारा संकल्प लोकतांत्रिक शक्तियों को नई ऊर्जा और उत्साह दे रहा है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि कोविड महामारी के कारण उत्पन्न प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद हमने वैक्सीन वितरण, आपूर्ति श्रृंखला का लचीला बनाने, जलवायु और आपदा प्रबंधन, आर्थिक सहयोग तथा अन्य क्षेत्रों के लिए अपना समन्वय बढ़ाया है जिससे पुरे एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में शांति, समृद्धि बढ़ी है और स्थिरता आई है.

प्रधानमंत्री ने संबोधन की शुरुआत में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मोदी ने कहा कि पीएम पद की शपथ लेने के 24 घंटे बाद ही हमारे बीच आपकी उपस्थिति क्वाड दोस्ती की ताकत और इसके प्रति आपकी वचनबद्धता को प्रकट करती है। टोक्यो क्वाड बैठक में पीएम मोदी के अलावा संगठन के सदस्य देशों के चारों शीर्ष नेता-अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलिया के एंथनी अल्बनीस, जापान के फुमिओ किशिदा भाग ले रहे हैं। PM मोदी ने जापान दौरे पर ऑटोमोबाइल दिग्गज सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन के एडवाइजर ओसामु सुजुकी से मुलाकात की। उसके बाद सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्पोरेशन के बोर्ड निदेशक मासायोशी सोन से भी मुलाकात की। दोनों ने भारत में निवेश, नवाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा की.

क्वाड देशों के चारों लीडर्स ने समिट के दौरान क्वाड फेलोशिप का ऐलान किया है। यह फेलोशिप अमेरिका में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र में ग्रेजुएशन करने वाले 100 भारतीय, अमेरिकी, आस्ट्रेलियाई और जापानी छात्रों को दी जाएगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने अपने संबोधन में कहा कि क्वाड को हिंद प्रशांत क्षेत्र की शांति व स्थिरता के लिए आगे काफी काम करना है। महामारी से मुकाबले के बाद जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका एक मजबूत, स्थिर और स्थायी साझेदार होगा। हम इस क्षेत्र की ताकत हैं। बाइडन ने क्वाड के मंच से रूस को सख्त संदेश देते हुए कहा कि यदि रूस युद्ध जारी रखता है तो विश्व के जवाब का नेतृत्व करेंगे। साझा मूल्यों और दृष्टिकोण के लिए हम साथ हैं।

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पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, भारत और अमेरिका की साझेदारी सही मायने में विश्वास की साझेदारी है। हमारे साझा हितों और मूल्यों ने दोनों देशों के बीच विश्वास के बंधन को मजबूत किया है। उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि हम यूएस डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन के लिए भारत में काम को जारी रखने, वैक्सीन उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा पहल का समर्थन करने के लिए समझौता कर चुके हैं। हम इंडो-यूएस वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम का नवीनीकरण कर रहे हैं। इस दौरान बाइडन ने कहा, भारत और अमेरिका मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। हम भारत के साथ धरती की अब तक की सबसे अच्छी दोस्ती करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

जापानी पीएम ने कहा कि युक्रेन पर रुसी आक्रमण संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित सिद्धांतों के खिलाफ व उन्हें चुनौती दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें आसियान, दक्षिण एशिया के साथ-साथ प्रशांत क्षेत्र के द्वीप देशों की आवाज पर भी गौर करना चाहिए, ताकि सहयोग को और आगे बढ़ाया जा सके।

ऑस्ट्रेलिया के पीएम अल्बनीस ने कहा कि हम अपने क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए और अधिक संसाधन और ऊर्जा लगाएंगे। हम प्रशांत क्षेत्र में नए व ज्यादा जटिल सामरिक माहौल की ओर बढ़ रहे हैं। हम क्वाड के साथ रहेंगे। हम समान विचारधारा वाले दोस्तों और सामूहिक रूप से भी एक-दूसरे के लिए खड़े रहेंगे। अल्बनीस ने कहा कि प्रशांत महासागर के द्वीप राष्ट्रों के लिए जलवायु परिवर्तन मुख्य आर्थिक और सुरक्षा चुनौती है। मेरी सरकार 2030 तक उत्सर्जन में 43 फीसदी कमी लाने का नया लक्ष्य तय करेगी। 2050 तक देश को शून्य उत्सर्जन के रास्ते पर लेकर जाएगी।

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