Home राजनीति भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ की कांग्रेस ने खोजी काट, दिया ये मन्त्र

भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ की कांग्रेस ने खोजी काट, दिया ये मन्त्र

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उदयपुर चिंतन शिविर से शुरू हुई कांग्रेस पार्टी में बदलाव की हवा का अब असर होने लगा है. लम्बे समय से चली आ रही पार्टी में बदलाव की मांग को अब अमलीजामा पहनाने की शुरुआत होती दिख रही है. इसके तहत पार्टी ने भाजपा के राष्ट्रवाद की काट के लिए नया मन्त्र खोजा है. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपने नाम में बदलाव किया है.

दरअसल अक्सर ऐसा होता है कि जब भाजपा किसी मुद्दे पर घिरती है तो वो इसे राष्ट्रवाद से जोड़ देती है. इससे विपक्षी दल भाजपा के राष्ट्रवाद के घेरे में आ जाते हैं और मुद्दा गौड़ हो जाता है. अब कांग्रेस ने इसकी काट खोज ली है. पार्टी ने तय किया है कि इसके लिए अब ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ का इस्तेमाल किया जायेगा.

कांग्रेस पार्टी के नाम में ही राष्ट्रवाद है. इसके स्थापना के समय पार्टी का नाम ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ था. बाद में सहूलियत के हिसाब से कांग्रेस पार्टी बोला जाने लगा, जो प्रचलन में आ गया. अब पार्टी ने निर्णय लिया है कि इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बोला जायेगा. इस सम्बन्ध में नेताओं को कहा भी जा चुका है.

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पार्टी इसे भाजपा के राष्ट्रवाद के काट के तौर पर प्रयोग करने का नया मन्त्र मान रही है. इसके अलावा कांग्रेस अपने ज़माने में हुए युद्धों की भी बात करेगी. कांग्रेस की सरकार के समय 1948, 1965 और 1971 में भारत में युद्ध लड़े गए. मगर आज बात केवल नरेंद्र मोदी की होती है. कांग्रेस पार्टी इन युद्धों को भुना नहीं पाई. पर अब पार्टी ने इन युद्धों को भुनाने का फैसला किया है.

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इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बीते मंगलवार को ‘पोलिटिकल अफेयर ग्रुप’ का गठन किया है, जिसमें कई नेताओं को नई जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि इसकी कमान खुद सोनिया गांधी ने अपने हाथ में रखी है. ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के लिए ‘टास्क फ़ोर्स 2024’ और ‘सेंटर प्लानिंग ग्रुप’ बनाया गया है. 2 अक्टूबर ‘गांधी जयंती’ के दिन से राहुल गांधी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ कश्मीर से कन्याकुमारी तक कि यात्रा की शुरुआत करेंगे. हालांकि अभी ये तय नहीं हुआ है कि इस यात्रा का फोर्मेट क्या रहेगा?

इस यात्रा में पब्लिक मीटिंग, जनसभाओं और राहुल किन-किन लोगों से मिलेंगे? कहाँ-कहाँ इस यात्रा का स्वागत होगा? जैसे मुद्दों पर पार्टी की प्लानिंग जारी है. देखना होगा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कंग्रेस पार्टी इन बदलावों का कितना फायदा उठा पाती है?

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