Home राजनीति महिला और आदिवासी वोटरों पर पकड़ मजबूत कर रही है भाजपा

महिला और आदिवासी वोटरों पर पकड़ मजबूत कर रही है भाजपा

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25 जुलाई. देश को नया राष्ट्रपति मिलेगा. भारत में हर राष्ट्रपति की शपथ इसी तारीख को होती है. आपातकाल ख़त्म होने के बाद नीलम संजीव रेड्डी भारत के छठे राष्ट्रपति (तीन कार्यवाहक राष्ट्रपतियों को छोड़कर) बने. 25 जुलाई 1977 को उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली. तब से अब तक हर राष्ट्रपति 25 जुलाई को ही शपथ लेते आ रहे हैं, जो अब परम्परा सी बन गई है .

पक्ष और विपक्ष दोनों इस समय देश में राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी करने में जुटे हुए हैं. मंगलवार को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा हुई. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा से आने वाली भाजपा नेता द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है तो वहीं विपक्ष ने पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा को.

द्रौपदी मुर्मू उड़िया नेता हैं जो आदिवासी समाज से आतीं हैं. बतौर शिक्षिका अपना कैरियर शुरू करने वाली मुर्मू ने पार्षद के रूप में राजनैतिक कैरियर की शुरुआत की. इसके बाद 2 बार रायरंगपुर से बीजेपी विधायक और एक बार सरकार में मंत्री रहीं.

18 मई 2015 को मुर्मू झारखण्ड की पहली महिला राज्यपाल बनीं. मुर्मू पहली उड़िया नेता थीं जो राज्यपाल बनीं साथ ही आदिवासी समाज से भी राज्यपाल बनने वाली वो पहली नेता थीं. 18 मई 2020 तक वो राज्यपाल रहीं. अब भाजपा ने मुर्मू को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है. यदि मुर्मू राष्ट्रपति बनतीं हैं जो लगभग तय माना जा रहा है, तो वो देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी. बतौर महिला प्रतिभा पाटिल के बाद दूसरी महिला राष्ट्रपति.

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दौपदी मुर्मू के नाम पर मुहर लगाकर भाजपा ने न सिर्फ महिलाओं बल्कि आदिवासी वोटरों पर पकड़ मजबूत बनाने का प्रयास किया है. बीते चुनावों के आकड़ों पर नज़र डालें तो बड़ी संख्या में महिला वोटर भाजपा के साथ जुड़ीं हैं. ऐसे में महिलाओं पर अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए भाजपा ने महिला उम्मीदवार पर दांव खेला है.

मुर्मू के सहारे बीजेपी ने आदिवासी वोटर्स को भी अपने साथ मजबूती से जोड़ने का प्रयास किया है. बता दें मध्य प्रदेश, झारखण्ड, राजस्थान, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में आदिवासी वोटर हैं. लगभग 60 सीटों पर आदिवासी मतदाता चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं. इतना ही नहीं लोकसभा की 543 सीटों में से 47 सीटें ऐसी हैं जो ST के लिए आरक्षित है. ऐसे में आदिवासी वोटर्स को अपने साथ मजबूती से जोड़ने के लिए भी बीजेपी का ये कदम खासा अहम माना जा रहा है.

वहीं विपक्ष की बात की जाये तो साझे उम्मीदवार के तौर पर यशवंत सिन्हा के नाम पर मुहर लग चुकी है. हालांकि अभी भी कुछ दलों ने इससे अपनी दूरी बनायी हुई है. यशवंत सिन्हा पूर्व भाजपा नेता हैं. पूर्व में आईएएस रहे. फिर सक्रिय राजनीति में आये. 1990 में चंद्रशेखर की सरकार में वित्त मंत्री रहे, फिर अटल बिहारी बाजपेई की सरकार में भी वित्त मंत्री बनाये गये. अटल सरकार में सिन्हा विदेश मंत्री भी रहे. फिलहाल वो टीएमसी में थे. राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में आने के बाद मंगलवार को ही उन्होंने टीएमसी छोड़ने की घोषणा कर दी थी.

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