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विद्युत संशोधन विधेयक 2022

by National News Desk
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आत्मजीत सिंह | बीकेयू असली।
 मोदी सरकार ने बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 पेश किया, जबकि उनके तत्कालीन संयुक्त सचिव, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय संजय अग्रवाल ने 9 दिसंबर 2021 को लिखित में दिया था कि बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 संसद में तब तक पेश नहीं किया जाएगा, जब तक इस मामले पर सभी किसान यूनियन संगठन या एसकेएम से चर्चा नहीं हो जाती है। बिल बिजली अधिनियम 2003 की धारा 14 में संशोधन के अनुसार अधिकतम/न्यूनतम टैरिफ कैप रखने के लिए नियामक आदेश के साथ वितरण नेटवर्क एक्सेस के उपयोग को सुविधाजनक बनाया जा सके।
यह अधिनियम धारा 60ए को शामिल करने का प्रस्ताव करता है ताकि कई वितरण लाइसेंसधारियों के मामले में बिजली खरीद और क्रॉस-सब्सिडी के प्रबंधन को सक्षम बनाया जा सके। एक क्रॉस सब्सिडी बैलेंसिंग फंड भी पेश किया गया है – हालांकि इसके बारे में कोई विस्तृत विवरण नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा टैरिफ नियंत्रित किए जाने वाले उपयुक्त आयोग द्वारा निर्दिष्ट तरीके से क्रॉस सब्सिडी का उपयोग निरस्त होता है। क्रॉस सब्सिडी का मतलब ग्रामीण इलाक़ों के मुक़ाबले शहरी क्षेत्र में व्यापार और उद्योगों के लिए उच्च शुल्क।
साथ ही बिजली एक समवर्ती विषय है; राज्य और केंद्र दोनों संविधान के अनुसार नियम बना सकते हैं लेकिन इस बिल को पेश करने से पहले राज्य सरकारों के साथ कोई परामर्श नहीं किया गया। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 39 (बी) का भी उल्लंघन करता है क्योंकि “कई एजेंसियों को लाइसेंस देकर बिजली क्षेत्र में अंधाधुंध निजीकरण और वितरण प्रणाली जिसके परिणामस्वरूप मूल्य वृद्धि होगी जो आम आदमी और विशेष रूप से किसान को प्रभावित करेगी क्योंकि बिजली कंपनियों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी उसे नहीं मिलेगी।
धारा 79 (जे) में संशोधन, केंद्र को राज्यों के परामर्श के बिना बहु-राज्य वितरण कंपनियों को लाइसेंस जारी करने का अधिकार देता है।”विधेयक संविधान के माध्यम से संविधान में संशोधन करना चाहता है और इस सदन की विधायी क्षमता से परे है।” जब बिजली की खुदरा बिक्री के लिए टैरिफ तय करने की राज्य आयोग की शक्ति की बात आती है तो बिल केंद्र द्वारा निर्धारित नियमों को ओवरराइडिंग पावर देता है। साथ ही धारा 85 में संशोधन के अनुसार, यह अक्षय स्रोतों के माध्यम से उत्पादित बिजली को न्यूनतम आवश्यकता के रूप में विशेषाधिकार देता है जिसे निजी खिलाड़ियों से डिस्कॉम द्वारा खरीदा जाना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा क्षेत्रीय और राज्य लोड डिस्पैच केंद्र हैं, पर अब राष्ट्रीय लोड डिस्पैच केंद्रों के पास लोड आपूर्ति को रोकने या उपयोग को डायवर्ट करने की शक्ति होगी, जब तक कि उनके पास राज्यों से भुगतान गारंटी न हो, जिसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि मतदाताओं को तब तक मुफ्त बिजली नहीं दी जा सकती जब तक कि राज्य इसके लिए भुगतान नहीं करता। रेवड़ी बाटने वाले राज्यों से मुफ्त बिजली बांटने का अधिकार छीन लिया गया है।उपरोक्त सभी हमारे संघीय संविधान के तहत किसानों और संबद्ध गतिविधियों, गरीब घरेलू और छोटे व्यवसायों को सब्सिडी प्रदान करने के लिए राज्यों की शक्ति को ख़त्म कर देगा।यह राज्य वितरण कंपनियों के कर्मचारियों और बिजली क्षेत्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए भी हानिकारक है क्योंकि अब उन सब की नौकरी चली जाएगी।

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