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RSS बैन पर गिरिराज का हमला

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RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अपने चुटीले भाषणों के लिए लोकप्रिय हैं. उनका अंदाज़ जहां आम लोगों को मनोरंजक लगता है वहीं विरोधी दलों को तीर की तरह चुभता है. राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(RSS) को एक हिंदू चरमपंथी संगठन बताते हुए बुधवार को कहा था कि इस पर भी बैन लगाया जाना चाहिए.

लालू यादव के इस बयान पर भाजप के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह  ने हमला बोला है. आरएसएस पर प्रतिबंध को लेकर पलटवार करते हुए बीजेपी नेता ने कहा कि हमें आरएसएस का स्वयंसेवक होने पर गर्व है. उन्होंने सवाल करते हुए पूछा कि क्या लालू यादव कह सकते हैं कि वो पीएफआई के सदस्य हैं? इतना ही नहीं उन्होंने बिहार में जदयू और आरजेडी गठबंधन सरकार को आरएसएसको लेकर चुनौती भी दे दी.

भाजपा नेता ने ट्विट किया, “हमें आरएसएसका स्वयंसेवक होने पर गर्व है. क्या लालू यादव कह सकते हैं कि वह PFI के सदस्य हैं? बिहार में उनकी सरकार है, हिम्मत है तो बिहार में आरएसएस को बैन कर दो.”

ट्विट के जरिये लालू पर हमला बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री ने अपने अन्य ट्विट में कहा, “लालू यादव जी की यादाश्त कमजोर हो गयी है, 1990 में जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब वे आरएसएस और बीजेपी का गुणगान कर रहे थे, आज वोट बैंक की जरुरत है तो PFI की तारीफ कर रहे हैं.”

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ये भी कहा कि देश की सामाजिक समरसता और सुरक्षा के लिए PFI पर प्रतिबन्ध का केंद्र की मोदी सरकार का कदम स्वागत योग्य है.

केंद्र सरकार के बैन के फैसले के बाद RJD  प्रमुख लालू यादव ने RSS को एक हिंदू चरमपंथी संगठन बताते हुए बुधवार को इस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अपने चुटीले भाषणों के लिए लोकप्रिय हैं. उनका अंदाज़ जहां आम लोगों को मनोरंजक लगता है वहीं विरोधी दलों को तीर की तरह चुभता है. इस लिए भाजपा की तरब से जवाब तो आना ही था.

पढ़ें : नीतीश कुमार ने छोड़ा एनडीए: बिहार में बदलाव के मायने
देखें : Bharat Jodo Yatra : Congress is excited by the history of political journeys

याद दिलाते चलें कि कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगी ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (IUML) ने केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया था. कांग्रेस नेताओं PFI को न केवल युवा पीढ़ी को बरगलाने की कोशिश बल्कि समाज में विभाजन व नफरत पैदा करने की कोशिश के आरोप लगते हुए प्रतिबंधित करने के फैसले का बुधवार को स्वागत किया था. साथ ही RSS पर भी इसी तरह रोक लगाने की मांग की.

बताते चलें कि केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI और उसके 8 सहयोगी संगठनों को UAPA के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित करते हुए 5 साल का बैन लगा दिया। पीएफआई के खिलाफ ये कार्रवाई अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेन्शन एक्ट जिसे UAPA कहते हैं उसके तहत की गई है. UAPA के तहत सरकार किसी भी संगठन को गैरकानूनी या आतंकी संगठन करार दे सकती है.

बैन के बाद हालांकि PFI से जुड़े लोगों के कोर्ट जा सकने संबंधी ख़बरें भी आ रहीं हैं. पर क़ानूनी अधिकारों की बात की जाये तो विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार देश भर में केन्द्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और राज्यों की पुलिस के पास अब ऐसे संगठनों के सदस्यों को गिरफ्तार करने, उनसे जुड़े खातों को फ्रीज़ करने और उनकी संपत्तियां जब्त करने का भी अधिकार है. इस संगठन से जुड़े किसी भी व्यक्ति को गैरकानूनी काम या इस तरह की किसी भी गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती  है.

वहीं संगठन सदस्यों या इससे जुड़े लोगों को भी कानूनी अधिकार हैं. प्रतिबन्ध के आदेशों से असंतुष्ट कोई भी भी व्यक्ति जिला न्यायालय में आवेदन कर सकता ही. इसके लिए उसे आदेश की तामील की तारीख से 14 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा.

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