Home राजनीति गेहूं निर्यात पर बैन : किसान फिर ठगे गये

गेहूं निर्यात पर बैन : किसान फिर ठगे गये

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जरा सोचिये “क्या हो यदि आपकी भोजन के थाली से रोटी या गेहूं के अन्य उत्पाद गायब हो जायें ?”  

आपको लग रहा होगा कि ये कैसा सवाल है? लगना भी चाहिए. भारत जैसे कृषि प्रधान देश में ऐसा कैसे हो सकता है? पर फ़िलहाल दुनिया के तमाम देशों में हालात ऐसे ही बन रहे हैं.

भारत ने गेहूं निर्यात पर रोक लगा दी है. कारण आटे के बढ़ते दाम और बेतहाशा बढ़ती महंगाई. देश में बढ़ती महंगाई और आटे के बेतहाशा बढ़ते दामों के चलते बीते 13 मई को भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर पाबन्दी लगा दी थी. पर भारत के इस कदम से दुनिया के कई देशों में गेहूं का संकट बढ़ गया है. कई देशों में गेहूं से बने उत्पादों का अकाल पड़ सकता है. इतना ही नहीं भारत के निर्यात पर रोक लगाने के बाद से इन देशों में गेहूं के उत्पादों की कीमतों में 60% तक की बृद्धि हुई है.

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गेहूं की पैदावार कम होना भी इसकी एक बड़ी वजह है. केंद्र का अनुमान था कि इस वर्ष गेहूं का उत्पादन लगभग 11.13 करोड़ टन रहेगा. पर उत्पादन 10 करोड़ टन से भी कम रहा. हालांकि अभी तक अंतिम आकड़े जारी नहीं हुए हैं. माना जा रहा है कि उत्पादन अभी और कम हुआ है.

कम उत्पादन की मुख्य वजह गर्म हवाओं (Heat wave) का जल्दी शुरू हो जाना रहा. गेहूं को तैयार होने के लिए 30 डिग्री से कम तापमान की जरुरत होती है. जबकि इस बार मार्च से ही गर्म हवाएं चलने लगीं, जिससे कई बार तापमान 40 डिग्री से भी ऊपर पहुंच गया. जिससे फसल पहले पक गई और उत्पादन कमजोर हो गया.

G-7 देशों ने भारत के इस कदम का विरोध किया है. वहीं चीन भारत के समर्थन में आ गया है. बताते चलें कि चीन के बाद भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है. हालांकि ये दोनों ही देश टॉप निर्यातकों की लिस्ट में नहीं आते. इसके पीछे कि सबसे बड़ा कारण इनकी जनसंख्या है. दोनों देश अपनी घरेलु आवश्यकताओं की पूर्ति में ही रह जाते हैं.

रूस, अमेरिका, कनाडा, फ़्रांस और युक्रेन गेहूं के टॉप 5 निर्यातक देश हैं. इनमें रूस और युक्रेन मिलकर 30% निर्यात करते हैं. वहीं भारत का अधिकतम निर्यात बांग्लादेश, नेपाल, युएई, क़तर, इंडोनेशिया, श्रीलंका, ओमान, मलेशिया और यमन देशों में होता है.

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भारत के कदम का समर्थन करते हुए चीन ने कहा है कि ‘भारत को अपने लोगों के लिए खाद्यान सुरक्षित रखने का पूरा अधिकार है. यदि समस्या ऐसी है तो G-7 देश आखिर बायो-फ्यूल कंजम्पशन कम कर 50% क्यों नहीं करते? बताते चलें कि G-7 देश 90 मिलियन टन फ़ूड बायोफ्युल में खर्च करते हैं.

रूस-युक्रेन युद्ध के चलते पहले ही वहां का निर्यात प्रभावित है. अब भारत द्वारा भी निर्यात पर रोक लगा देने के बाद कई देशों में गेहूं की समस्या बढ़ गई है. वहीं रोक लगने से गेहूं के दामों में आई गिरावट से किसानों की आमदनी कम हो गयी. अब देखना होगा कि इन दोनों समस्यायों से निपटने के लिए केंद्र क्या कदम उठता है ?

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