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उत्तराखंड विधानसभा में भर्ती घोटाला, स्पीकर ने बैठाई जांच

by Brijesh Singh
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देहरादून : उत्तराखंड विधानसभा में बैकडोर से हुई नियुक्तियों की जांच कराने का फैसला लिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने तीन सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। कमेटी एक महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट देगी। सभी प्रकार की नियुक्तियों और प्रमोशन को जांच के दायरे में रखा गया है। उधर, एक साल में तीन-तीन प्रमोशन लेकर विधानसभा में सचिव बनने वाले अधिकारी मुकेश सिंघल को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। उनके दफ्तर को सील कर दिया गया है।

उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर ऋतु खंडूरी एक सप्ताह के टूर पर कनाडा गई थी। शुक्रवार को वह दिल्ली लौटीं और शनिवार को देहरादून आगमन हुआ। देहरादून आने के बाद अपराह्न तीन बजे उन्होंने विधानसभा के अपने दफ्तर में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मीडिया और अन्य स्रोतों से उन्हें विधानसभा में बैकडोर से हुई नियुक्तियों की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि इसकी तह तक जाने के लिए उन्होंने दो फैसले लिए हैं। पहला यह कि तीन सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है। इसमें पूर्व प्रमुख सचिव डीके कोटिया को अध्यक्ष बनाया गया है। पूर्व कार्मिक सचिव एसएस रावत और पूर्व आईएएस अवनेंद्र सिंह नयाल को सदस्य बनाया गया है। स्पीकर ने बताया कि तीनों विषयगत मामलों के विशेषज्ञ हैं। जांच कमेटी को एक महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच के दायरे में विधानसभा में बैकडोर से हुई सभी नियुक्तियों और पदोन्नतियों को रखा गया है। स्पीकर ने बताया कि दूसरे फैसले के तहत विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। उन्हें यह हिदायत दी गई है कि जांच कमेटी को जब भी उनसे पूछताछ की जरूरत होगी वह सहयोग के लिए तैयार होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बैकडोर नियुक्तियों की जांच दो फेज में होगी। वर्ष 2000 में गठित विधानसभा में वर्ष 2011 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा की नियमावली चलती रही। उसके बाद वर्ष 2012 में उत्तराखंड विधानसभा की अपनी नियमावली तैयार हुई। विस अध्यक्ष ने बताया कि पहले चरण में वर्ष 2012 से अब तक हुई नियुक्तियों ओर पदोन्नतियों को रखा गया है। दूसरे चरण में यदि जरूरत हुई तो वर्ष 2011 तक की जांच कराई जाएगी।

कुल मिलाकर, गोविंद सिंह कुंजवाल (स्पीकर 2012 से 2017) के कार्यकाल की 158 नियुक्तियों और प्रेमचंद अग्रवाल (स्पीकर 2017 से 22) के कार्यकाल में हुई 72 नियुक्तियों की जांच होगी।

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