Home देस-परदेस कूनो नेशनल पार्क : चीतों का नया घर

कूनो नेशनल पार्क : चीतों का नया घर

Print Friendly, PDF & Email

नामीबिया से भारत लाये गये 8 चीते चर्चा में हैं. भारत में इन्हें लाने की सफलता के पीछे लम्बी मशक्कत की गई है. इन चीतों को कैसे भारत लाया गया? यहाँ इन्हें कैसे रखा जायेगा? इनको लाने कि कवायद कब शुरू हुई और इसमें कितना खर्चा आया? जानिए इस विडियो में….

शनिवार को 8 चीतों को नामीबिया से स्पेशल चार्टर्ड कार्गो फ्लाइट से ग्वालियर एयरबेस लाया गया, फिर चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए चीतों को कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया. इस तरह भारत का 70 वर्षों का इंतजार खत्म हुआ और नामीबिया से आए 8 चीतों ने देश की सरजमीं पर पहला कदम रखा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में बॉक्स खोलकर 3 चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा। PM मोदी ने चीते भेजने के लिए नामीबिया का आभार माना।

प्रधानमंत्री ने इस मौके के लिए कहा था कि हमने उस समय को भी देखा जब प्रकृति दोहन को शक्ति प्रदर्शन मान लिया गया था. 1947 में देश में केवल 3 चीते ही बचे थे, उनका भी शिकार कर दिया गया. साथ ही उन्होंने इस शुरुआत को शुभ बताते हुए कहा कि प्रकृति-पर्यावरण, पशु-पक्षी भारत के लिए सेंसिबिलिटी और स्प्रिचुअलिटी के आधार हैं.

बताते चलें कि 1952 में भारत में चीतों के विलुप्त होने की घोषणा की गई थी। करीब 70 साल बाद देश में अब चीते दिखाई देंगे।

भारत लाये गये चीतों में पांच मादा और तीन नर चीतों को लेकर विमान ने नामीबिया की राजधानी होसिया से उड़ान भरी। मॉडिफाइड बोइंग 747 विमान से लाए गए इन चीतों में रेडियो कॉलर लगे हुए हैं। इसके लिए विमान में खास माप वाले पिंजरे बनाए गए थे। करीब आठ हजार किलोमीटर की यात्रा करके ये चीते शनिवार सुबह ग्वालियर में उतरे। ग्वालियर से इन्हें विशेष चिनूक हेलिकॉप्टर से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया.

क्या है इन चीतों की खासियत?

भारत पहुंचे चीतों में दो नर चीते सगे भाई हैं. इनकी उम्र ढाई से साढ़े पांच साल के बीच है। बताते चलें कि चीते की औसत उम्र 12 साल होती है। दोनों नामीबिया के ओटजीवारोंगो स्थिति निजि रिजर्व से लाए गए हैं। तीसरे नर चीते की उम्र साढ़े चार साल है। इसे एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व से लाया गया है। पांच मादा चीतों में एक दो साल, एक ढाई साल, एक तीन से चार साल तो दो पांच-पांच साल की हैं।

देखें : Gujarat Auto Politics : BJP in the trap of Kejriwal, Manoj Tiwari seen with autowalas
पढ़े : क्या गेंहू पर रिलायंस ने झूठ बोला था?

भारत में इन्हें रखा कैसे जाएगा?

कूनो नेशनल पार्क पहुंचे ये चीते 30 दिन तक क्वॉरंटीन रहेंगे। इस दौरान इन्हें बाड़े के अंदर रखा जाएगा। बाड़े में उनके स्वास्थ्य और अन्य गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। सबकुछ ठीक रहा तो तीस दिन बाद सभी चीतों को जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

कूनो नेशनल पार्क को ही क्यों चुना गया ?

भारत लाये गये इन चीतों को कूनो नेशनल पार्क में ही क्यों रखा जायेगा? ये सवाल भी खासा चर्चा में है. दरअसल कूनो नेशनल पार्क को करीब एक दशक पहले गिर के एशियाई शेरों को लाने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, गिर से इन शेरों को कूनो नहीं लाया जा सका। स्थानांतरण की सारी तैयारियां यहां हुई थीं। शेर के शिकार के लिए संभल, चीतल जैसे जानवरों को भी कूनों में स्थानांतरित किया गया था। गिर के जंगलों से शेर भले ही यहाँ नहीं आ सके पर शेर के लिए की गई तैयारी अब चीतों के स्थानांतरण के वक्त काम आ गयी। कूनो के अलावा सरकार ने मध्य प्रदेश के ही नौरादेही वन्य अभयारण्य, राजस्थान में भैसरोडगढ़ वन्यजीव परिसर और शाहगढ़ में भी वैज्ञानिक आकलन कराया था। आकलन के बाद कूनो को चीतों के स्थानांतरण के लिए चुना गया।

इतना ही नहीं यहां अभी और चीते लाये जाने की संभावना है. फ़िलहाल ये चीते नामीबिया से लाए गए हैं। खबर है कि दक्षिण अफ्रीका से भी चीता लाने के लिए सरकार की बात लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द ही यहां से भी चीते लाए जाएंगे। सरकार की योजना अगले पांच साल तक अफ्रीका के अलग-अलग देशों से चीते लाकर हिन्दुस्तान में बसाने की है।

कब शुरू हुई थी चीतों को भारत लाने की कवायद?

अब जानते हैं कि चीतों को भारत लाने की कहानी शुरू कब हुई? भारत में चीतों को बसने की ये पहली कवायद नहीं है. आजादी के पांच साल बाद 1952 में देश में चीतों के विलुप्त होने का एलान किया गया। उसी वक्त सरकार ने चीतों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने का भी एलान किया। 1970 के दशक में ईरान से एशियाई शेरों के बदले एशियाई चीतों को भारत लाने के लिए बात शुरू भी हुई, पर ईरान में चीतों की कम आबादी और अफ्रीकी चीतों व ईरानी चीतों में समानता को देखते हुए तय किया गया कि अफ्रीकी चीतों को भारत लाया जाएगा।

2009 में देश में चीतों को लाने की कोशिशें नए सिरे से शुरू हईं। इसके लिए तत्कालीन UPA सरकार द्वारा ‘अफ्रीकन चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया’ नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 2010 से 2012 के दौरान देश के दस वन्य अभयारण्यों का सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क को चीतों के लिए चयनित किया गया।

कितना हुआ खर्च?

बात करें इस कवायद में हुए खर्चे कि तो फरवरी 2022 में सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि चीता प्रोजेक्ट के लिए 2021-22 से 2025-26 तक के लिए 38.70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इन चीतों को इसी प्रोजेक्ट के तहत भारत लाया जा रहा है।

 

 

You may also like

Leave a Comment