Home आर्थिक घरेलू बजट पर मार है RBI की मौद्रिक नीति

घरेलू बजट पर मार है RBI की मौद्रिक नीति

by Admin Desk
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RBI मौद्रिक नीति 2022-23 : भारतीय रिजर्व बैंक ने दरों में बढ़ोत्तरी की घोषणा की
आत्मजीत│अमेरिका और यूरोपीय देशों की आक्रामक मौद्रिक नीति ने इक्विटी, बॉन्ड और मौजूदा बाजारों में तनाव पैदा कर दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था तूफान और अंधकारमय है। मंदी जारी रहेगी और मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहेगी। एमपीसी की बैठक में 28-30 सितंबर को आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर रेपो रेट 5.4% से बढ़ाकर 5.9% कर दी गई। आज की बढ़ोतरी सहित कुल रेपो दर 190 मूल अंक पर बनी हुई है, जो अप्रैल में 4% से सितंबर 22 में 5.9% हो गयी है।
Q1 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि अनुमानित 16.2% की जगह 13.5% थी। उच्च मुद्रास्फीति की निरंतरता मूल्य दबावों के विस्तार को रोकने, मुद्रास्फीति प्रत्याशा को स्थिर करने और दूसरे जमीनी प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक समायोजन को और अधिक जांचने की आवश्यकता है ऐसा RBI गवर्नर ने कहा।
एमपीसी जून 2019 में समायोजन की स्थिति में आ गया है, रेपो दर 5.75% थी, हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति लगभग 3% पर थी। आज मुद्रास्फीति 7% के आसपास मँडरा रही है और Q2 में 6% के ऊपर रहने की उम्मीद है। सरकारी व्यय से तरलता बढ़ेगी जो वर्तमान में सितंबर 2022 में 1.1 लाख करोड़ के औसत दैनिक अवशोषण पर है।
9 सितंबर को बैंक क्रेडिट में 16.2% की वृद्धि हुई है, वित्त वर्ष 2022-23 में 9 सितंबर तक वाणिज्यिक क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों का कुल प्रवाह 9.3 लाख करोड़ हो गया है।  FY’23 की पहली तिमाही में क्षमता उपयोग बढ़कर 74.2% हो गया है।  जुलाई 2022 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में औद्योगिक गतिविधि 2.4% तक फिसल गई। वित्त वर्ष 23 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को संशोधित कर 7% कर दिया गया है, दूसरी तिमाही में 6.3%, तीसरी तिमाही में 4.6% और चौथी तिमाही में 4.6%।  FY23-24 की पहली तिमाही का अनुमान 7.2% है।
घरेलू मुद्रास्फीति 22 अगस्त में बढ़कर 7% हो गई, जो 22 जुलाई में 6.7% थी। मानसून में देरी से अनाज, सब्जियों और तेलों की कीमतों में वृद्धि हुई है।  वित्त वर्ष 2022-23 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 6.7% आंका गया है जबकि Q2 में 7.1% Q3 में 6.5% और Q4 में 5.8% जोखिम के साथ समान रूप से संतुलित है।  वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति और कम होकर 5% रहने का अनुमान है।
प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में 14.5% की वृद्धि हुई है। 1 अप्रैल से भारतीय रुपये में USD के मुकाबले 7.4% की गिरावट आई है। FY23 की पहली तिमाही के लिए चालू खाता घाटा GDP का 2.8% है, जिसमें व्यापार घाटा GDP का 8.1% है। भारत की आयात वृद्धि उसके निर्यात से कहीं अधिक है। अप्रैल- जुलाई 2022 में शुद्ध एफडीआई $18.9 बिलियन है। लगातार 9 महीनों के बहिर्वाह के बाद जुलाई-सितंबर के दौरान एफपीआई का शुद्ध अंतर्वाह $7.5 बिलियन दर्ज किया गया है।  23 सितंबर को भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार अब 537.5 बिलियन डॉलर है। विदेशी भंडार में 67 फीसदी की गिरावट यूएसडी और उच्च अमेरिकी बॉन्ड दरों की सराहना में मूल्यांकन परिवर्तन के कारण है।

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